छाताबाद मे फिर भू धसान,तालाब का पानी समाया पाताल में
AJ डेस्क: धनबाद जिले में भूधसान की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। कतरास क्षेत्र के छाताबाद में एक बार फिर तेज आवाज के साथ जमीन धंस गई। काजू बागान स्थित तालाब के समीप हुए इस भूधसान के बाद जमीन के बीचों-बीच बड़ा गोफ बन गया है। हैरानी की बात यह है कि भूधसान स्थल के समीप स्थित बड़े तालाब का पानी तेजी से जमीन के अंदर समा रहा है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल है और स्थानीय लोग दहशत में हैं। खास बात यह है कि छाताबाद में 20 दिनों तक चले आशियाना आंदोलन की समाप्ति के महज दूसरे दिन ही यह नई भूधसान की घटना सामने आई है।
छाताबाद काजू बागान तालाब के समीप अचानक तेज आवाज के साथ जमीन धंस गई। देखते ही देखते वहां एक बड़ा और गहरा गोफ बन गया। भूधसान के बाद समीप के बड़े तालाब का पानी तेजी से इस गड्ढे में समाने लगा, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई।
घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए। लोगों का कहना है कि जिस तरह से लगातार भूधसान की घटनाएं हो रही हैं, उससे पूरे इलाके के भविष्य को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।
बता दें कि इससे पहले 7 अगस्त को छाताबाद में बड़ी भूधसान की घटना हुई थी, जिसमें करीब 20 घर जमींदोज हो गए थे। इसके बाद प्रभावित लोगों ने मुआवजा और पुनर्वास की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन आशियाना आंदोलन शुरू किया था।
यह आंदोलन करीब 20 दिनों तक चला। बाद में मंत्री हफीजुल हसन की अगुवाई में त्रिपक्षीय वार्ता हुई, जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया। लेकिन आंदोलन समाप्त होने के दूसरे ही दिन एक बार फिर भूधसान की घटना ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थानीय निवासी अफसर उर्फ छोटू ने कहा कि छाताबाद लगातार भूधसान की घटनाओं से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक इलाके की स्थिति को लेकर ठोस कार्रवाई और सर्वे शुरू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि तालाब का पानी लगातार गोफ में समा रहा है, जिससे आगे आसपास के इलाकों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका है।
उन्होंने छाताबाद के लोगों से एकजुट होकर इलाके को बचाने के लिए आगे आने की अपील की और बीसीसीएल से जल्द सर्वे कराकर खतरे वाले क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा और बचाव कार्य शुरू करने की मांग की।
फिलहाल घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और बीसीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। साथ ही बने गोफ को भरने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
