पुल का सम्पर्क सड़क काटे जाने से ग्रामीण भड़के,आंदोलन शुरू
AJ डेस्क: धनबाद के झरिया विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्य और आम लोगों की आवाजाही को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करोड़ों रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन इसी बीच भौंरा से जहाजटांड़ जाने वाले वर्षों पुराने मुख्य मार्ग को कथित तौर पर बीसीसीएल और एटी देवप्रभा आउटसोर्सिंग कंपनी ने काट दिया। सड़क बंद होने से हजारों की आबादी प्रभावित है और ग्रामीणों का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है। ग्रामीणों ने आउटसोर्सिंग परियोजना का काम अनिश्चितकाल के लिए बंद करा दिया है। आंदोलन के समर्थन में भौंरा बाजार भी बंद रहा। मौके पर पहुंचे मेयर संजीव सिंह समेत कई नेताओं ने ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया। वहीं बीसीसीएल प्रबंधन का कहना है कि काटा गया रास्ता उसकी जमीन पर था और कोयला खनन परियोजना के लिए सड़क हटाना जरूरी था।
बताया जा रहा है कि शुक्रवार देर रात भौंरा से जहाजटांड़ जाने वाले मुख्य मार्ग को कथित तौर पर बिना पूर्व सूचना के काट दिया गया। सुबह जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली तो लोगों में भारी आक्रोश फैल गया।
जहाजटांड़ और भौंरा के ग्रामीणों ने इसके विरोध में देवप्रभा आउटसोर्सिंग परियोजना का काम बंद करा दिया और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक पुराने मुख्य रास्ते को दोबारा चालू नहीं किया जाता, तब तक आउटसोर्सिंग का काम नहीं चलने दिया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों पुराने मुख्य मार्ग को बंद कर दिया गया और इसके बदले जो वैकल्पिक रास्ता दिया गया है, वह सुरक्षित नहीं है।
लोगों का कहना है कि नया रास्ता माइनिंग क्षेत्र के अंदर से होकर गुजरता है, जहां भारी वाहन और कोयला ढुलाई के ट्रक लगातार चलते रहते हैं। सड़क के दोनों ओर खाई होने के कारण किसी भी समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों के अनुसार, इस रास्ते से महिलाओं और छात्र-छात्राओं को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। नया रास्ता लंबा होने के कारण आवागमन में अधिक समय लग रहा है और सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।
आंदोलन की जानकारी मिलने पर धनबाद के मेयर संजीव सिंह भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से पूरे मामले की जानकारी ली। मेयर ने आंदोलनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि जब तक ग्रामीणों की समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक आउटसोर्सिंग का काम बंद रहेगा।
वहीं कांग्रेस नेता गुड्डू सिंह और भाजपा नेता योगेंद्र यादव भी धरनास्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों के आंदोलन को समर्थन दिया।
नेताओं के पहुंचने के बाद बीसीसीएल भौंरा क्षेत्र के एजेंट भी मौके पर पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों और बीसीसीएल प्रबंधन के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
हालांकि बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की गई, लेकिन देर तक चली चर्चा के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी।
ग्रामीणों की मांग है कि जिस पुराने रास्ते से वे वर्षों से आवागमन करते आ रहे हैं, उसे फिर से चालू किया जाए। काटे गए हिस्से की भराई कर सड़क को पहले की तरह दुरुस्त किया जाए।
वहीं पूरे मामले पर भौंरा कोलियरी के एजीएम एलएल बर्नवाल ने अलग पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जिस रास्ते को काटा गया है, वह बीसीसीएल की जमीन पर था। ग्रामीणों के लिए वैकल्पिक रास्ते की व्यवस्था की गई है।
एजीएम के मुताबिक कोयला खनन परियोजना के काम के लिए सड़क को हटाना जरूरी था। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जिस सड़क और पुल का निर्माण हो रहा है, उसके लिए बीसीसीएल से एनओसी नहीं ली गई थी।
