Wed. Apr 8th, 2020

नक्सली क्षेत्र के तेरह सीटों पर 62% मतदान, कई दिग्गजों का भाग्य EVM में कैद

AJ डेस्क: झारखंड में विधानसभा चुनाव के लिए आज (शनिवार, 30 नवंबर) पहले चरण के तहत वोट डाले गए, जिसमें नक्‍सल प्रभावित 13 सीटों के लिए मतदान कराया गया। इन इलाकों के नक्‍सल प्रभावित होने की वजह से यहां कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इन 13 सीटों पर करीब 62.87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। इन क्षेत्रों के नक्‍सल प्रभावित होने के कारण यहां मतदान अपराह्न 3 बजे तक ही कराने का फैसला लिया गया था।

 

 

झारखंड में आज जिन 13 सीटों के लिए मतदान कराए गए, उनमें चतरा, गुमला, बिशुनपुर, लोहरदगा, मनिका, लातेहार, पांकी, डाल्टेनगंज, विश्रामपुर, छत्तरपुर, हुसैनाबाद, गढ़वा और भवनाथपुर सीट शामिल हैं, जहां 189 उम्मीदवारों की किस्‍मत आज ईवीएम में बंद हो गई। इस बीच राज्‍य के गुमला जिले में नक्‍सली हमले की सूचना है, जहां बिष्‍णुपुर में नक्‍सलियों ने एक पुल को उड़ा दिया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और उपायुक्‍त शशि रंजन ने यह भी कहा कि नक्‍सली हमले के कारण यहां मतदान प्रभावित नहीं हुआ।

 

 

राज्‍य में कड़ी सुरक्षा के बीच जारी मतदान के दौरान पलामू जिले में बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में झड़प की सूचना भी है, जिस दौरान पथराव भी हुआ। बताया जा रहा है कि यहां एक मतदान केंद्र पर बीजेपी उम्‍मीदवार आलोक चौरसिया के समर्थकों ने कांग्रेस प्रत्‍याशी केएन त्रिपाठी को मतदान केंद्र के भीतर नहीं जाने दिया, जिसके कारण दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। इस दौरान कांग्रेस प्रत्‍याशी केएन त्रिपाठी ने बंदूक निकाल ली, जिसका वीडियो भी सामने आया है। यह घटना पलामू जिले के कोसियारा गांव की बताई जा रही है।

 

 

 

आमने-सामने हैं कई दिग्‍गज

झारखंड में हो रहा यह चुनाव बीजेपी और विपक्ष, दोनों के लिए कई मायनों में खास है। बीजेपी जहां एक बार फिर से सत्‍ता में वापसी को लेकर जोर आजमाए हुए है, वहीं कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी पार्टियां मुख्‍यमंत्री रघुबर दास की सरकार को सियासी अखाड़े में पटखनी देने की कोशिश में है। इस चरण में यूं तो 189 उम्‍मीदवार मैदान में हैं, पर जिन प्रमुख उम्‍मीदवारों की चर्चा है, उनमें राज्‍य के स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव और पूर्व मंत्री व बीजेपी नेता भानु प्रताप शाही का नाम शामिल है।

 

 

दलबदलुओं पर एक नजर

इस चरण के चुनाव में दलबदलुओं की भी परीक्षा होनी है, जिसमें सबसे दिलचस्प लोहरदगा विधानसभा सीट को बताया जा रहा है। यहां से कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत इस बार बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस ने उनके खिलाफ प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को मैदान में उतारा है। वहीं छत्‍तरपुर विधानसभा क्षेत्र से से निवर्तमान विधायक राधाकृष्ण किशोर इस बार ऑल झारखंड स्‍टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं, जिन्‍हें बीजेपी ने इस बार टिकट नहीं दिया।

 

 

इसी तरह कभी झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता रहे आलोक चौरसिया इस बार डाल्‍टेनगंज से बीजेपी के प्रत्याशी हैं, जिन्‍होंने 2014 का चुनाव झामुमो उम्‍मीदवार के तौर पर जीता था। वहीं, चतरा से बीजेपी उम्‍मीदवार जनार्दन पासवान ने राष्‍ट्रीय जनता दल को छोड़कर सत्‍तारूढ़ पार्टी का रुख किया था। वहीं, वर्ष 2014 में झारखंड विकास मोर्चा के के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले सत्यानंद भोक्ता इस बार राजद के प्रत्‍याशी हैं।

 

 

झारखंड की राजनीति में प्रमुख नाम भानुप्रताप शाही अब बीजेपी के नेता हैं और भवनाथपुर विधानसभा सीट से पार्टी के उम्‍मीदवार हैं। हालांकि 2014 का चुनाव उन्‍होंने इसी सीट से किसी अन्‍य पार्टी के टिकट पर चुनाव जीता था। पांच साल पहले हुए चुनाव में उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी अनंत प्रताप देव को चुनाव हराया था, लेकिन इस बार वह खुद बीजेपी से मैदान में हैं, जबकि अनंत प्रताप निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

 

 

करोड़पति उम्‍मीदवार

झारखंड में पहले चरण के तहत हो रहे चुनाव के लिए मैदान में डटे 189 में से लगभग 35 उम्‍मीदवार करोड़पति हैं, जिनमें सर्वाधिक संख्‍या बीजेपी उम्‍मीदवारों की है। बीजेपी ने पहले चरण के तहत 13 में से 12 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतारे हैं, जिनमें से नौ करोड़पति हैं। इसके बाद झामुमो के उम्‍मीदवारों का नंबर है, जिसने सभी 13 सीटों पर अपने प्रत्‍याशी उतारे हैं। पार्टी के सात उम्‍मीदवार करोड़पति हैं। कांग्रेस छह सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जिनमें से पांच उम्‍मीदवार करोड़पति हैं, वहीं जनता दल (यूनाइटेड) ने भी 12 सीटों पर उम्‍मीदवार उतारे हैं, जिनमें से पांच के पास करोड़ों की संपत्ति है। अन्‍य पार्टियों के कई उम्‍मीदवार भी करोड़पति हैं।

 

 

वे मुद्दे, जो चुनाव प्रचार में छाए रहे

इस चुनाव में प्रचार के लिए बीजेपी ने पूरी ताकत झोंक दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित पार्टी के कई दिग्‍गज नेता यहां प्रचार के लिए पहुंचे, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी के नेता राहुल गांधी ने यहां प्रचार नहीं किया, बल्कि पार्टी की ओर से प्रचार की कमान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश प्रभारी आरपीएन सिंह, सुबोधकांत सहाय ने संभाली। बीजेपी ने यहां राम मंदिर निर्माण, राष्ट्रीय सुरक्षा, जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए जाने, नक्सलवाद और विकास को मुद्दा बनाया तो कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अपनी नाकामी को छिपाने के लिए बीजेपी अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दे उठा रही है।

 

 

झामुमो की ओर से पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने चुनाव प्रचार की कमान संभाली तो आरजेडी की ओर से तेजस्वी यादव और शरद यादव ने प्रचार किया। विपक्षी नेताओं ने अपनी सभाओं में मुख्य रूप से आदिवासियों के हितों से जुड़े मामलों और स्‍थानीय मुद्दों को उठाया।

 

 

 

 

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