बिहार के विभूति: आईंस्टान के सिद्धान्त को चुनौती देने वाले “वशिष्ट” अब नहीं रहे

AJ डेस्क: बिहार के विभूति भारत की शान आइंस्टाइन के सिद्धांत को चुनौती देने वाले महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 77 साल की उम्र में निधन हो गया है। वशिष्ठ नारायण सिंह अपने परिजनों के संग पटना के कुल्हरिया कंपलेक्स में रहते थे। आज सुबह उनके मुंह से खून निकलने लगा, जिसके बाद तत्काल उनके परिजन उन्हें पीएमसीएच लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 

 

गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह के निधन पर देश में शोक की लहर है। कई नामी हस्तियां उनके निधन पर शोक प्रकट कर रहे हैं। बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह को नमन करते हुए ट्वीट किया, “बिहार के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह जी के निधन पर शोक संवेदना प्रकट करता हूं। ऐसी महान विभूति को कोटिश: नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि।”

 

 

 

 

आरा के बसंतपुर के रहने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह बचपन से ही होनहार थे। खुदा ने कुछ खास तरह के ज़ेहन से उन्हें नवाजा था। ज्यादातर लोगों के लिए गणित मतलब ‘हमसे ना हो पाएगा’, लेकिन जो उनसे मैथ सीख लेता था उसे इस विषय से प्यार हो जाता है।

 

 

 

डॉ. वशिष्ठ बचपन से ही बहुत मेधावी रहे, उनके बारे में जिसने भी जाना हैरत में पड़ गया। छठी क्लास में नेतरहाट के एक स्कूल में कदम रखा, तो फिर पलट कर नहीं देखा। एक गरीब घर का लड़का हर क्लास में कामयाबी की नई इबारत लिख रहा था। वे पटना साइंस कॉलेज में पढ़ रहे थे कि तभी किस्मत चमकी और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन कैली की नजर उन पर पड़ी, जिसके बाद वशिष्ठ नारायण 1965 में अमेरिका चले गए और वहीं से 1969 में उन्होंने PHD की।

 

 

वशिष्ठ नारायण ने ‘साइकिल वेक्टर स्पेस थ्योरी’ पर शोध किया। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी मिली। उन्‍हें नासा में भी काम करने का मौका मिला। यहां भी वशिष्ठ नारायण की काबिलयत ने लोगों को हैरान कर दिया। बताया जाता है कि अपोलो की लॉन्चिंग के वक्त अचानक कम्यूपटर्स ने काम करना बंद कर दिया, तो वशिष्ठ नारायण ने खुद से कैलकुलेशन शुरू कर दिया, जिसे बाद में सही माना गया। ये महान गणितज्ञ को लंबे समय से सिजोफ्रेनिया नामक दिमागी बीमारी से भी जूझ रहे थे।

 

 

 

 

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