Sun. Jan 26th, 2020

तमिलनायडू में “जल्लीकटु”: सात-सात सौ बैलों के साथ होगी भिड़ंत (देखें खतरनाक वीडियो)

AJ डेस्क: तमिलनाडु में कई जगह जल्लीकट्टू का आयोजन किया जा रहा है। मदुरई के अवानियापुरम में इसका आयोजन किया गया। अवानियापुरम में 730 बैल, अलंगनल्लूर में 700 बैल और पलामेडु में 650 बैल इस साल जल्लीकट्टू प्रतियोगिताओं में भाग ले रहे हैं। अवानियापुरम में 730 बैलों को पकड़ने वाले भी हैं।

 

 

चार दिवसीय फसल उत्सव पोंगल आज से शुरू हो रहा है, इसी मौके पर जल्लीकट्टू का भी आयोजन किया जा रहा है। ये मवेशियों और मनुष्यों के बीच एक आक्रामक प्रतियोगिता है जो कि तमिलनाडु में लोकप्रिय है।

 

 

जल्लीकट्टू पर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन तमिलनाडु और केंद्र सरकार ने राज्य में व्यापक विरोध के बीच इस फैसले को पलटने का काम किया। जल्लीकट्टू को तमिलनाडु के गौरव और संस्कृति का प्रतीक कहा जाता है। ये 2000 साल पुराना खेल है जो उनकी संस्कृति से जुड़ा है। समर्थकों का यह भी दावा है कि जल्लीकट्टू प्रजनन के लिए मजबूत बैल की पहचान करने में उनकी मदद करता है।

 

 

देखें वीडियो-

 

 

 

ये खेल कई बार काफी खतरनाक हो जाता है, कई लोग इसमें घायल हो जाते हैं। कई बार तो लोगों की जान तक चली जाती है। इस खेल में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले बैल और शख्स को इनाम दिया जाता है। इस प्रतियोगिता में बैलों के साथ कुछ लोग मैदान में उतरते हैं। इसमें बैल को काबू में करने की कोशिश की जाती है। इस दौरान प्रतिभागियों और बैलों के बीच की घमासान को देखकर दर्शकों की सांसें थम जाती हैं। मैदान में एक तरफ जहां लोगों की भीड़ होती है वहीं दूसरी तरफ एक गुस्साया बैल उनकी तरफ हमला करने के दौड़ लगाता है इसी को काबू करने का खेल है जलीकट्टू। इसमें बैल को बांधकर, उसकी पूंछ पकड़कर या उसका सींग पकड़ कर उसे काबू में करने की कोशिश की जाती है।

 

 

प्रतियोगिता पूरा होने के बाद जो भी बैल को काबू करने में कामयाब हो जाता है उसे बैल के सींग पर बंधी पैसों की थैली इनाम में दी जाती है।

 

 

 

 

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