Mon. Jun 1st, 2020

झारखण्ड: पाकुड़िया के थानेदार की हेकड़ी, विधायक को फोन करने वाले को पीटा, खबर लिखने वाला गया जेल, देखें Video-

AJ डेस्क: कोरोना वायरस (कोविड 19) की वजह से आज पुरा देश 21 दिनों के लिए लॉक डाउन है। ऐसे में देश के अलग-अलग हिस्सों से पुलिस कि दिल को छू जाने वाली तस्वीरें सामने आ रही है। हां, कही-कही पुलिस को इस भयावह स्थिति से निपटने के लिए लोगों से थोड़ी सख्ती भी बरतनी पड़ रही है, लेकिन कुल मिलाकर पुलिस का एक सकारात्मक चेहरा देखने को मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर झारखण्ड के पाकुड़ से पुलिस का एक ऐसा चेहरा भी सामने आया जिसमें पूर्वग्रह, घमंड और पुलिसिया रौब भरा है।

 

 

पाकुड़ जिले के पाकुड़िया प्रखंड में बीते बुधवार को दो घटना घटी। दोनों ही घटना अलग अलग है, लेकिन दोनों ही घटना पुलिसिया छवि को धूमिल कर देने वाली है।

 

 

पहली घटना-

पाकुड़िया के एक पत्रकार ने अखबार में खबर छापी कि, पाकुड़िया थाने में थानेदार ने आम एवं जेनेटरी पर्सन ऑफ प्रखंड क्षेत्र के लोगों को बुला कर एक बैठक की और लोगों को निर्देश दिया कि लॉकडाउन के दौरान थाना क्षेत्र के किसी भी इलाके में किसी भी तरह के सार्वजनिक एकत्रीकरण की कोई भी कार्यक्रम का आयोजन न करें। थानेदार का ये प्रयास और निर्देश स्वाभाविक रूप से स्वागतयोग्य एवं सराहनीय था, लेकिन थाने में जो बैठक रखी गई थी, वह स्वयं एक भीड़ और असुरक्षित गेदरिंग लग रही थी।

 

 

पत्रकार ने ये ख़बर फोटो के साथ छापी और थाने में एक अच्छी मंशा के लिए ग़लत ढंग की भीड़ जमा करने पर सवाल उठा दिया।

 

 

बस यही सही सवाल पत्रकार को भारी पड़ गया, और थानेदार के एक चहेते व्यक्ति ने पत्रकार को फोन किया और उसे इस खबर के छापने के एवज में बूरे परिणाम भुगतने की धमकी दिया। पत्रकार को फोन पर धमकियां दे रहे चहेते की बातें रेकॉर्ड हो गई। पत्रकार इस धमकी की रिकॉर्डिंग को लेकर एस पी पाकुड़ को सूचित करनेवाले थे इसी बीच थानेदार को भी इस बात की भनक लग गई। उन्होंने अपने चहेते हितेषी को माफ़ी माँग कर मामला सलटाने की सलाह दी, माफ़ी मांगी गई, पत्रकार ने सामाजिकता के नाते माफ़ कर दिया।

 

फोन रिकॉर्डिंग-

 

 

अब माफ़ी मिलने की खुशी में हजूर अंगूर की बेटी को ज्यादा चूम गए, और मोटरसाइकिल से घर जाते समय गिर पड़े। चोट सर पर लगी। दूसरे दिन थाने में माफ़ी देने वाले पत्रकार पर मारपीट का आरोप लगा कर एक शिकायत थाने में कर दी गई। इससे अख़बार की छपी ख़बर से आहत थानेदार एक्टिव हो गए, और पत्रकार तत्काल गिरफ्तार कर जेलयात्रा पर भेज दिया।

 

 

बताया जाता है कि पत्रकार को ख़बर छपने पर धमकी देनेवाले, फिर माफ़ी माँगनेवाले तथा शराब पीकर मोटरसाइकिल से गिरने वाला और फिर मारपीट का झूठा मुकदमा करनेवाला एक ही व्यक्ति है जो थानेदार का चहेता होने के साथ साथ सत्ताधारी पार्टी का भी भी चहेता बताया जाता है।

 

दूसरी घटना-

एक पार्टी के नेता सहित परिवार के लोगों को थानेदार ने सरेआम दुर्व्यवहार करते हुए इसलिए पीट दिया कि वे अपने घर के किसी वृद्ध सदस्य को दिखाने और दवा लेने एक से ज़्यादा व्यक्ति घर से निकल पड़े थे। आप यहाँ वीडियो में उस थानेदार को लाठी भांजते साफ़-साफ़ देख सकते है।

 

देखें वीडियो-

 

 

खैर अब पत्रकार संगठन के लोगों ने पाकुड़ में पुलिस के समाचारों के बहिष्कार का फ़ैसला लिया है। यहाँ प्रेस क्लब और पत्रकार संगठन मिलकर लड़ने को कमर कस चुके हैं। बहिष्कार के साथ काला बिल्ला लगा कर काम करने पर सहमति बनी है। वहीं इस कातिल कोरोना के कहर के बीच पत्रकार और पुलिस की यह लड़ाई जिला प्रशासन और सरकार के लिए एक मुसीबत भी बन सकती है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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