जानें अपने कैप्टन कूल की कहानी, मैदान ही नहीं घर में भी रहते हैं शांत

AJ डेस्क: अपने करियर के आखिरी पड़ाव में आ चुके धोनी का यह आखिरी वर्ल्ड कप हो सकता है। कहा जा रहा है कि विश्व कप के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुकी भारतीय टीम का आखिरी मैच धोनी के अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी मैच होगा। भारतीय टीम भी अपने पूर्व कप्तान को विश्व कप तोहफा दे कर विदा करना चाहेंगे। 38 साल की उम्र में जब किसी भी खिलाड़ी की आंखे कमज़ोर होने लगती हैं और रन लेते समय कदमों की रफ़्तार भी धीमी होने लगती है, वहीं धोनी आज भी विकेट के पीछे दूसरे विकेट कीपरों के मुक़ाबले सबसे तेज़-तर्रार है। इतना ही नहीं विकेट के बीच में दौड़ में तो वह कई युवा खिलाड़ियो को भी पानी पिलाने की क्षमता रखते है।

 

 

कैप्टन कूल के नाम से मशहूर टीम इंडिया के पूर्व कप्तान एमएस धोनी पर्सनल लाइफ में भी उतने ही कूल हैं। क्रिकेट की कई बुलंदियों को छुने वाले धोनी भले ही आज एक स्टार की लाइफ जीते हैं, लेकिन क्रिकेटर बनने से पहले और करियर के शुरुआती दौर में धोनी बिल्कुल सिंपल लाइफ जीते थे।

 

 

 

7 जुलाई 1981 को एक मिडिल क्लास फैमिली में जन्में धोनी आज भी सिंपल लाइफ जीने में विश्वास रखते हैं, लेकिन स्टारडम हमेशा उनके साथ रहता है। उन्होंने मिडिल क्लास फैमिली से निकलकर स्टार क्रिकेटर बनने तक का सफर तय किया है। आज भले ही धोनी काफी सक्सेस हैं, लेकिन एक दौर था जब धोनी समान्य तरिके से अपने परिवार के साथ रहा करते थे। धोनी का बचपन झारखंड की राजधानी रांची में ही बीता। धोनी के पिता रांची में मेकॉन कंपनी में जूनियर मैनेजमेंट के पद पर नौकरी करते थे और उन्हें रहने के लिए सरकारी क्वाटर मिला था, जिसमें उनका पूरा परिवार रहता था।

 

 

बचपन में धोनी का पहला पसंद क्रिकेट नहीं, बल्कि फुटबॉल और बैडमिंटन था। धोनी रांची के डीएवी श्यामली स्कूल में पढ़ते थे और स्कूल की फुटबॉल टीम के गोलकीपर हुआ करते थे। वो डिस्ट्रिक्ट और क्लब लेवल तक बैडमिंटन और फुटबॉल भी खेल चुके हैं।

 

 

एक बार उनके स्कूल की क्रिकेट टीम का विकेटकीपर नहीं आया तो कोच ने धोनी को विकेटकीपर बनकर टीम के साथ खेलने के लिए बोला। धोनी की विकेटकीपिंग ने कई लोगों को आकर्षित किया और कोच ने उनको क्रिकेट में विकेटकीपर बनने के लिए कहा। 10वीं क्लास से धोनी ने क्रिकट में ध्यान लगाना शुरू किया और उसके बाद आगे बढ़ते गए।

 

 

धोनी  1998 में बिहार की अंडर-19 क्रिकेट टीम का हिस्सा थे। उनकी टीम पंजाब के खिलाफ हार गई, लेकिन उनका परफॉर्मेंस की तारीफ हुई। इसके बाद धोनी को बिहार रणजी टीम में शामिल कर लिया गया। एक दौर में वो रेलवे में टिकट कलेक्टर की नौकरी करते थे। खड़गपुर रेलवे स्टेशन पर पोस्टिंग हुई। धोनी ने 2001 से 2003 तक यह नौकरी की, लेकिन इसके बाद क्रिकेट में करियर बनाने के लिए सरकारी नौकरी छोड़ दी। 2003 और 2004 में अच्छी परफॉर्मेंस के बाद धोनी को इंडिया-ए टीम में और उसके बाद इंडिया टीम में शामिल किया गया।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Article पसंद आया तो इसे अभी शेयर करें!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »