पी एम के बत्तियां बुझाने के आह्वान से सकते में क्यों आ गया “बिजली विभाग”, पढ़ें पूरी खबर
AJ डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए लोगों को 5 अप्रैल की रात नौ बजे घर की बत्तियां बुझा कर दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाने को कहा है। पूरे देश में लोग नौ मिनट तक घर की बत्तियां बुझा कर रखेंगे। लेकिन बिजली उत्पादन, वितरण कंपनियां और राज्यों में बिजली पहुंचाने में लगी कंपनियों के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
झारखण्ड बिजली वितरण निगम लिमिटेड धनबाद के एसडीओ इरफ़ान खान ने बताया कि यह किसी चलती कार में अचानक ब्रेक लगाने जैसा होगा या फिर फ्लोर पर एक्सलरेटर दबाने जैसा। यह पता नहीं कि कार कैसा बिहेव करेगी। अधिकारियों का कहना है कि उनके पास इस नौ मिनट को प्लान करने के लिए वक्त है। यह एक चैलेंज है और अभूतपूर्व चैलेंज है। लेकिन इसे पूरा करना संभव है। इसे समझने के लिए घरों तक बिजली पहुंचने की प्रक्रिया को समझनी होगी।
उन्होंने बताया कि घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए तीन स्टेकहोल्डर जिम्मेदार होते हैं- बिजली उत्पादन कंपनियां, राज्यों की वितरण कंपनियां और स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर। यह तीनों आपस में बिजली की डिमांड और सप्लाई में तालमेल बिठाते हैं।
ये तय करते हैं कि ग्रिड में कितनी सप्लाई चाहिए। उसे यह सुनिश्चित करना होता है कि पावर ग्रिड में बिजली की फ्रीक्वेंसी 48.5 से 51.5 हर्ट्ज के बीच होनी चाहिए। अगर फ्रीक्वेंसी ज्यादा या कम हो तो ब्लैकआउट हो सकता है, जैसा कि 2012 में पूरे देश में हुआ था। यह दुनिया का सबसे बड़ा ब्लैकआउट था और 60 करोड़ की आबादी अचानक बिजली से महरूम हो गई थी।
ये नौ मिनट बेहद अहम और चुनौती भरे हैं। क्योंकि यह 15 मिनट का टाइम ब्लॉक नहीं है और बिजली सप्लाई का जो अत्याधुनिक सिस्टम है उसे इतने कम समय में re-cofigured नहीं किया जा सकता। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि पांच अप्रैल को लोग सिर्फ अपनी घरों की लाइट्स ऑफ करें। पंखे और फ्रिज और एयरकंडीशनर जैसे दूसरे उपकरण नहीं। उसे चलते रहने। इससे सप्लाई और डिमांड में बहुत अंतर नहीं आएगा। स्ट्रीट लाइट और दूसरी सार्वजनिक जगहों की लाइट्स भी जलती रहेंगी। इससे बिजली डिमांड में नौ-दस फीसदी का उतार-चढ़ाव रहेगा। ऐसे में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई को एडजस्ट करना आसान नहीं होगा।
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