आंदोलन : 952 kg प्याज बेचकर किसान कमाता है सिर्फ एक रुपए, क्यों ?

AJ डेस्क: देश भर में किसान आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। दरअसल नए कृषि कानून बिल को लेकर किसान खुश नहीं है या यूं कहें कि किसान संगठन और किसान व्यापारी खुश नहीं है। नए कानून से किसानों को फायदा मिलेगा या नहीं ये तो अभी साफ नहीं है लेकिन मौजूदा कानून से तो किसानों को नुकसान हो ही रहा है। सरकार ने आखिर क्यों 70 साल पुराने कानून में बदलाव किया ये भी बड़ा सवाल है। सरकार को लगता है कि किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य नहीं मिल रहा है।

 

 

देश भर में किसान अपनी फसलों को औने पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं आए दिन सुनने को मिलता है कि यहां इतना अनाज सड़ गया, वहां इतना अनाज सड़ गया। बेचारे किसानो को प्याज, बैंगन जैसी सब्जियां एक रुपए किलो बेचने पर मजबूर होना पड़ा। लेकिन क्या हो सकती है इनके पीछे की वजह आइए जानने की कोशिश करते हैं।

 

 

952 किलो प्याज बेचने पर केवल 1 रुपए की कमाई-

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एक किसान ने 952 किलो प्याज बेचा लेकिन उसे मिला केवल एक रुपए। सुनकर बड़ा अजीब लगता है न लेकिन ये है बिल्कुल सच्चाई। दरअसल किसान की फसल के दाम के बीच में आढ़ती, हमाली, भराई, तोलाई, मोटर भाड़े सब काटने के बात किसान को उस फसल की रकम मिलती है। जो कही से कही पहुंच जाती है। आइए इसे और समझने की कोशिश करते हैं।

 

 

पल्लवी ट्रेडिंग ने 952 किलो प्याज खरीदा – 1523 रुपए का ( 1.60 रुपए प्रति किलो)

आढ़तियों ने काटे – 91.35 रुपए

हमाली के कटे  –  59.00 रुपए

भराई के कटे –    18.55 रुपए

तोलाई के कटे –    33.30 रुपए

मोटर भाड़े के कटे –  1320 रुपए

कुल                   1522 रुपए

 

 

 

 

पल्ल्वी ट्रेडिंग ने दाम दिया – 1523 रुपए

बीच में कट गए                    1522 रुपए

किसान को क्या मिला     –        1 रुपया

 

 

ये है किसानों की हकीकत-

दरअसल य़े केवल पल्लवी ट्रेडिंग की ही कहानी नहीं है कमोवेश हर जगह यही हाल है इसलिए देश का किसान मर रहा है। ये तो आपने जानी किसान की कमाई। अब आपको बताते कि आढ़तिए कितना कमाते है। एफसीआई की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक केवल पंजाब से धान और गेंहू के लिए एफसीआई को करीब 8000 करोड़ रुपए देने पड़ते हैं। जिसका करीब 8.5 फासदी कमीशन एफसीआई मंडी के व्यारपारियों और आढ़तियों को देता है।

 

 

क्या कहते हैं एक्सपर्ट-

एग्रीकल्चर एक्सपर्ट विजय सरदाना ने बताया कि ये सारा खेल इसलिए खेला जा रहा है कि ताकि मंडियों में बैठे इन कारोबारियों का कमीशन खत्म न हो सके। सरदाना ने बाताया कि एफसीआई के पिछले साल के ऑडिटेड फाइनेंशियल रिपोर्ट के मुताबिक एफसीआई को मंडियों से जो अनाज मिलता है इसके बदले वो 2600 रुपए प्रति टन मंडियों को चुकाती है। जिसमें से मंडी में बैठे आढ़तियों या एजेंटो को 460 रुपए का कमीशन हर बोरी पर मिलता है। अब आप अंदाजा लगा लिजिए कि अगर किसान खुद अपना अनाज मंडियों को दे तो फिर ये रुपए किसके बचेंगे देश के टैक्सपेयर्स के ही न। और नुकसान किसका होगा मंडियों में बैठे इन किसान कारोबारियों का।

 

 

 

 

 

 

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