प्रकृति की गोद में बसे “पंचेत” पर ग्रहण लगा रहा कोयला तस्कर “रमेश”

AJ डेस्क: प्रकृति की गोद में बसा है पंचेत। खूबसूरत डैम और हरे भरे वृक्षों के बीच शांत वातावरण में बसे पंचेत की खूबसूरती पर ग्रहण लगा रहा है कोयला तस्कर रमेश।

 

 

बीसीसीएल के एरिया बारह में पड़ता है “लुची बाद”। बीसीसीएल प्रबंधन द्वारा लुची बाद को खतरनाक क्षेत्र घोषित कर वहां से उत्पादन बंद कर दिया गया है। वही लुची बाद आज रमेश के लिए कमाऊ खदान साबित हो रहा है। जंगल के बीच में बंद पड़े लुची बाद खदान में हैवी जरनेटर सेट लगाकर चौबीसों घंटे मोटर के द्वारा खदान से पानी निकाला जा रहा है। दिन रात मजदूर कोयले की अवैध कटाई कर रहे हैं। वहां हर पल खदान में मौत मंडराते नजर आता है। हाल में हादसा हो भी चुका है। अवैध खनन के दौरान धसान होने से एक मजदूर की मौत भी हो चुकी है फिर भी रमेश का अवैध कारोबार निर्बाध चल रहा है।

 

 

आश्चर्य की बात है कि स्थानीय पुलिस को न तो जरनेटर की आवाज सुनाई पड़ता है न ही मजदूरों की हलचल। रोज रात में चोरी का कोयला लोड कर पंद्रह से बीस ट्रक वहां से निकलता है, इसकी भी भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लगती। जबकि पंचेत के जंगल में नक्सल गतिविधि भी नहीं है। स्थानीय पुलिस की सूचना तंत्र सही में इतना कमजोर है तो वह खूबसूरत जंगल अपराधियों का अड्डा भी बन सकता है।

 

 

जानकार कहते हैं कि रमेश के जलवा के आगे सब कुछ फीका पड़ जाता है। चांदी की चाबुक की मार सबके हाथ को जकड़ देता है। सभी अपना कर्तव्य भूल रमेश के इस काले कारनामे के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सहभागी बन जाते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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