सूर्यदेव सिंह की 35 वीं पुण्यतिथि: जनसेवा संकल्प के साथ श्रद्धांजलि
AJ डेस्क: झरिया कोयलांचल के प्रख्यात मजदूर नेता, पूर्व विधायक और श्रमिक हितों की बुलंद आवाज रहे स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि सोमवार को श्रद्धा, सम्मान और जनसेवा के संकल्प के साथ मनाई गई। इस अवसर पर झरिया क्षेत्र ‘वीर सूर्यदेव सिंह अमर रहें’ के नारों से गूंज उठा। कतरास मोड़ चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सुबह से ही हजारों लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
भीषण गर्मी और तेज धूप के बावजूद श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल होने वालों का उत्साह देखते ही बन रहा था। झारखंड के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से पहुंचे मजदूरों, समर्थकों और शुभचिंतकों ने अपने प्रिय नेता को श्रद्धासुमन अर्पित किए। पूरे दिन श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा।
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि लंबे समय बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और संगठन से जुड़े लोग बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए। इस दौरान सूर्यदेव सिंह के परिवार के सभी सदस्य उपस्थित रहे और उनके संघर्षपूर्ण जीवन तथा श्रमिकों के लिए किए गए योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम में धनबाद के मेयर संजीव सिंह, झरिया विधायक रागिनी सिंह, सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह सहित हजारों समर्थक मौजूद रहे। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1991 में सूर्यदेव सिंह के निधन के तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद उनकी लोकप्रियता और मजदूरों के बीच उनकी पहचान आज भी बरकरार है।
पुण्यतिथि समारोह को केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रखा गया बल्कि इसे जनसेवा से भी जोड़ा गया। झरिया विधायक रागिनी सिंह ने अपने विधायक मद से एक दर्जन दिव्यांगजनों के बीच स्कूटी का वितरण किया। लाभुकों ने इस पहल को अपने जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए आभार व्यक्त किया।
इसके अलावा एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। रक्तदाताओं ने इसे स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि बताते हुए समाजसेवा का संदेश दिया। शिविर में स्वास्थ्य जांच और परामर्श की भी व्यवस्था की गई थी।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने सूर्यदेव सिंह के राजनीतिक, सामाजिक और श्रमिक आंदोलनों में दिए गए योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पूरा जीवन मजदूरों के अधिकार, सम्मान और सामाजिक न्याय की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया था। यही कारण है कि आज भी कोयलांचल की जनता उन्हें सम्मान और गर्व के साथ याद करती है।
