जयंती : अटल जी की विमला भाभी और केंद्रीय मंत्री रवि शंकर की माँ नहीं रहीं
AJ डेस्क: पूरा देश शुक्रवार को भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मना रहा है। बिहार में उनके करीबियों की लंबी फेहरिस्त है। इसी में शुमार हैं भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और सेवानिवृत्त प्रोफेसर किरण घई। बिहार में बीजेपी संगठन को गढ़ने वाली नेताओं में किरण का नाम पहली पंक्ति में है। बिहार में अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी मित्र बीजेपी के कद्दावर नेता रहे ठाकुर प्रसाद भी थे। अटलजी जब भी पटना आते थे, उनके घर भोजन करना नहीं भूलते थे। यह अजीब इत्तफाक है कि अटल बिहारी वाजजेयी की जयंती की पूर्व रात्रि ठाकुर प्रसाद की पत्नी व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की मां विमला प्रसाद का पटना में निधन हो गया। किरण घई ने अटलजी और ठाकुर प्रसाद व विमला प्रसाद से जुड़ा एक संस्मरण याद करते हुए बताया कि कैसे विमला भाभी के बनाए मालपुआ को खाने के लिए अटलजी बेताब हाे गए थे।
अटलजी के साथ बिताए पलों को याद करते हुए किरण कहती हैं कि यादों का एक स्वभाव होता है। एक बार कोई खिड़की या रोशनदान खुला नहीं कि यादों का हुजूम उमड़ पड़ता है। अटल जी से जुड़ी कई स्मृतियां आज भी जेहन में बादलों की तरह उमड़ती-घुमड़ती रहती हैं। संगठन और सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने के बाद भी वे हमेशा साधारण से साधारण कार्यकर्ताओं के लिए बस अटलजी ही बने रहे।

पकवानों में मालपुआ देखकर प्रसन्न हो गए थे अटलजी-
केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के घर पर एक बार अटलजी के साथ भोजन करने संबंधित वाकये का जिक्र करते हुए किरण घई यादों में खो जाती हैं। वे कहती हैं कि भोजन पर मुझे भी आमंत्रित किया गया था। आज भी याद है खाने की मेज पर तरह-तरह के व्यंजन देखकर उनके चेहरे पर आनंद का भाव देखने लायक था। अटलजी तमाम पकवान में मालपुआ देखकर प्रसन्न हो गए थे। बोल पड़े ओ… मालपुआ भी है। विमला भाभी (रविशंकर प्रसाद की मां) बनाई होंगी। अब तो इसके साथ न्याय करना ही पड़ेगा। कहते-कहते दो-तीन मालपुए उठाकर अपनी प्लेट में रख लिए। अटलजी सुस्वादु भोजन की प्रशंसा दिल से करते थे। यही नहीं, भोजन कराने वाले को संतुष्ट करने में भी अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ते थे।

विराट रहा था व्यक्तित्व, आज भी हैं प्ररेणास्रोत-
बकौल किरण घई, अशोक सिनेमा हॉल के मालिक कृष्ण बल्लभ प्रसाद नारायण सिंह उर्फ बउआ जी के यहां भी अटलजी के साथ भोजन करने की याद जेहन में ताजा है। आज जब राजनीति के क्षेत्र में छोटे पद पाकर भी नेता और कार्यकर्ताओं को अनायास कलफ लगे कपड़ों की तरह अकड़ते देखती हूं तो अटलजी की याद बरबस आ जाती है। उनका विराट व्यक्तित्व और बड़ा लगने लगता है। मेरी समझ से बड़े नेताओं से लेकर छोटे कार्यकर्ताओं के लिए अटलजी आज भी प्ररेणास्रोत हैं।
सहजता से मान लेते थे छोटे कार्यकर्ताओं की मनुहार-
अटलजी की बिहार यात्रा, खासकर पटना दौरे के कई अहम पल किरण को आज भी उसी तरह याद हैं। कहती हैं कि अटलजी छोटे कार्यकर्ताओं की मनुहार और आग्रह सहजता से मान लेते थे। पटना एयरपोर्ट पर बतौर प्रधानमंत्री अटल जी ने पत्रकारों से बातचीत के संबंधित कई बड़े नेताओं के आग्रह को ठुकरा दिया था, लेकिन जब मैंने कहा कि सर घंटों से पत्रकार इंतजार कर रहे हैं। दो शब्द ही बोल दीजिए तो उन्होंने मेरा आग्रह स्वीकार कर लिया।
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